चार धाम पवित्र यात्रा 30 अप्रैल, 2025 से शुरू हो रही है. जिसको लेकर प्रदेश सरकार ने हर स्तर पर तैयारियां तेज कर दी हैं। गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट खुलने के साथ यात्रा आरंभ होगी. ऑनलाइन और ऑफलाइन पंजीकरण जल्द ही शुरू होंगे.
आगामी चारधाम यात्रा को सुगम और व्यवस्थित बनाने के लिए प्रदेश सरकार ने हर स्तर पर तैयारियां तेज कर दी हैं। पांच दिन में सात लाख लोग यात्रा के लिए पंजीकरण कर चुके हैं। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार चारधाम यात्रा दस दिन पहले शुरू हो रही है। पंजीकरण में तीर्थ यात्रियों का उत्साह देखते हुए प्रदेश सरकार भीड़ प्रबंधन की रणनीति पर काम कर रही है…

मान्यताओं के अनुसार जो व्यक्ति अपने जीवन में एक बार चार धाम यात्रा कर लेता है उसे जन्म और मृत्यु के इस चक्र से मुक्ति मिल जाती है और फिर उसे दोबारा मृत्यु लोक में जन्म नहीं लेना पड़ता है इतना ही नहीं चार धाम यात्रा से व्यक्ति के आध्यात्मिक विकास में भी सहायता होती है। पांच दिन में अब तक यात्रा पर आने के लिए सात लाख लोग पंजीकरण कर चुके हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि यात्रा में भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के छह मार्च को मां यमुना के शीतकालीन गद्दी स्थल मुखबा और पर्यटन स्थल हर्षिल के दौरे से यात्रा के लिए अच्छा माहौल तैयार हुआ है।
सीएम ने निर्देश दिए कि यात्रा की सभी तैयारियां समय पर पूरी कर ली जाएं.. यात्रा से पहले सड़क, पेयजल, विद्युत, स्वास्थ्य लुविधाओं की समुचित व्यवस्था की जाए। यातायात प्रबंधन और यात्रा मार्गों पर पार्किंग की उचित व्यवस्था की जाए। चारधाम यात्रा के लिए सरकार ने एसओपी जारी कर दी है.. यात्री किस भी तरह की स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर तत्काल 104 नंबर पर क़ल कर सकेंगे.. यह एसओपी 12 भाषाओं में जारी की गई है.. सचिव स्वास्थ्य डॉ. आर राजेश कुमार की ओर से जारी एसओपी में तीर्थयात्रियों की स्वास्थ्य सुरक्षा पर विशेष जोर दिया गया है..
चमोली के जिला मजिस्ट्रेट संदीप तिवारी ने चारधाम यात्रा पर कहा, “आज कमिश्नर की अध्यक्षता में बैठक हुई, जिसमें सड़क मरम्मत पर चर्चा की गई…धाम के अंदर पेयजल, बिजली, शौचालय व्यवस्था आदि के लिए कार्य शुरू हो गए हैं और उम्मीद है कि 25 अप्रैल तक सभी कार्य पूरे हो जाएंगे और अच्छी और सुगम यात्रा होगी… संवेदनशील स्थानों पर स्पष्ट निर्देश लगाए जाएंगे।
चारधाम यात्रा को लेकर उत्तराखंड पुलिस ने तैयारियां पूरी कर ली हैं. लाखों श्रद्धालुओं की आमद को देखते हुए सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को मजबूत किया गया है. इस साल यात्रा मार्ग मे पहली बार 15 सुपर जोन, 41 ज़ोन और 137 सेक्टरों में विभाजित किया गया है, प्रत्येक सेक्टर का क्षेत्र 10 किलोमीटर रहेगा। यहां पर पुलिसकर्मी 24 घंटे गश्त और अन्य ड्यूटी करेंगे।
क्या है चारधामों की विशेषात?
अब आपको बताते हैं चारों धामों की विशेषता और महत्व। चार धामों गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ की अपनी अलग विषेशताएं हैं। आमतौर पर यह यात्रा 12 दिन में पूरी हो जाती है लेकिन आप सड़क मार्ग की बजाय चार धाम यात्रा के लिए हवाई मार्ग लेते है तो फिर अवधि घट सकती है। यात्रा के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और देखते ही देखते लाखों की संख्या में लोगों ने पंजीकरण करा लिया चारधाम जाने के लिए पंजीकृत लोगों की संख्या चंद दिनों में 6 लाख पार पहुंच गई। चार धाम यात्रा के लिए ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों तरह से रजिस्ट्रेशन होता है उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद ने चारधाम यात्रा के लिए पंजीकरण को अनिवार्य किया है जिससे कि श्रद्धालु निर्धारित तिथि पर दर्शन का लाभ उठा सकें। इच्छुक यात्री वेबसाइट पर जाकर आधार कार्ड के जरिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं लेकिन यहां वीआईपी दर्शन पर कमिश्नर गढ़वाल ने बड़ा फैसला लिया है कि अब आने वाले दिनों में किसी को वीआईपी दर्शन नहीं मिलेंगे।
गढ़वाल हिमालय की मनमोहक पहाड़ियों में बसा केदारनाथ धाम मंदिर 6 महीने तक बंद रहने के बाद अब 2 मई को फिर से खुलने वाला है. यह मंदिर, सबसे पवित्र हिंदू तीर्थ स्थलों में से एक है, जो चार धाम यात्रा का हिस्सा है. हर साल हजारों श्रद्धालु इस यात्रा में शामिल होने आते हैं. केदारनाथ उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में 11,968 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। केदारनाथ के कपाट हर साल सर्दियों में बंद कर दिए जाते हैं. केदारनाथ मंदिर हिमालय की ऊंचाइयों पर स्थित है, जहां सर्दियों के समय भारी बर्फबारी होती है. बर्फबारी के चलते वहां जाने वाले सारे रास्ते बंद हो जाते हैं और उस इलाके में रहना बहुत मुश्किल हो जाता है.इसलिए सर्दियों की शुरुआत से पहले हर साल मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं. कहा जाता है कपाट बंद होने के बाद भगवान शिव उखीमठ में विराजते हैं. उखीमठ को पंचकेदार में एक खास स्थान माना जाता है और यह भी बताया गया है कि शीतकाल में भगवान केदारनाथ की डोली यहीं लाई जाती है।