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यूपी की राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना या भ्रष्टाचार योजना-सुहागनों को बना दिया 'विधवा',अफसर डकार गये रकम

[Edited By: Vijay]

Wednesday, 21st July , 2021 12:56 pm

यूपी में राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना भ्रष्टाचार का केंद्र बन गई है। एक के बाद एक बड़े घपले सामने आ रहे हैं। अब लखनऊ के ही दो गांवों में 29 फर्जी लाभार्थी मिले हैं। इनमें 21 महिलाओं के पतियों के जीवित होते हुए भी उन्हें मृत दिखा दिया गया है। ताकि, योजना के तहत प्रति लाभार्थी मिलने वाले 30 हजार रुपयों की बंदरबांट की जा सके। अगर ईमानदारी से पूरे प्रदेश में इस योजना की जांच करा ली जाए, तो और भी बड़े घपलों के सामने आने की आशंका से कुछ अफसर भी इंकार नहीं कर रहे हैं।

लखनऊ की तहसील सरोजनीनगर के ग्राम बंथरा और चंद्रावल में वर्ष 2019-20 और 2020-21 में कुल 88 लोगों को योजना का लाभ दिया गया। इस योजना के अंतर्गत उन परिवारों को लाभ दिया जाता है, जो गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन कर रहे हों। साथ ही मृत्यु के समय कमाऊ मुखिया की उम्र 60 बरस से कम हो। आम तौर पर पति के मरने पर पत्नी के बैंक खाते में राशि भेजी जाती है।

पिछले दो साल में बंथरा में मिलन देवी, रेखा, सोनी, शशी, सुनीता, रामा, संगीता शर्मा, रघुराई, रुची सविता, राम रानी, सन्नो, राजकुमारी, स्नीला देवी, मुन्नी, किरन, वंदना, ज्योति, काजल देवी, लीला, रंजना और बजिया को उनकी पति की कथित मृत्यु पर इस योजना का लाभ दिया गया। पड़ताल में सामने आया है कि इन 21 महिलाओं के पति क्रमश: राम प्रकाश, बराती, धर्मवीर, राजोल, शंकर, राम कुमार, सत्य प्रकाश, रज्जन लाल, विनोद कुमार, भाई लाल, अमृत लाल, भगवती, छंगा, मो. इदरीश, रामचंद्र, मन्नू, संगीता, विवेक कुमार, राजेंद्र कुमार, सुजीत और राजू अभी भी जीवित हैं। यानी इन महिलाओं को फर्जी ढंग से भुगतान किया गया।

खाते में आई आधी राशि ले लेते हैं सरकारी कर्मी और दलाल

जिस व्यक्ति की कोशिश से उन्हें यह राशि मिली, उसने 10-15 हजार रुपये तक ले लिए। इसके अलावा बंथरा की ही माया देवी के पति सुरेश कुमार की मृत्य 17 मई 2016 को हुई, मगर ऑनलाइन आवेदन में इस तिथि को 14 नवंबर 2019 दिखाकर योजना का लाभ दिया गया। जबकि, मृत्यु के साल भर के भीतर ही आवेदन करने पर योजना का लाभ दिए जाने का प्रावधान है।

मतलब, माया देवी को भी फर्जी ढंग से भुगतान किया गया। बंथरा की ही रामरती के पति कल्लू की मौत तो 28 मई 2009 को हुई थी, पर उन्हें वर्ष 2019-20 में योजना का लाभ दिया गया। इसी तरह से चंद्रावल की बताशा पत्नी लेखई, पियारा पत्नी रज्जन, बंथरा की किरन देवी पत्नी सुभाष चंद्र, शिवपति पत्नी मुन्ना राठौर, श्माम रानी पत्नी कृष्ण कांत गुप्ता और श्यामवती पत्नी विजय कुमार को अपात्र होते हुए भी भुगतान किया गया।

पहले भी हुयी है धांधली

इससे पहले भी चित्रकूट में दो फर्जी लाभार्थियों का खुलासा किया गया था, जिनसे बाद में रिकवरी हुई। एफआईआर भी कराई गई। हालांकि, इन दो के अलावा अन्य किसी लाभार्थी का सत्यापन नहीं कराया गया। बलरामपुर में भी बड़े घपले की जांच अभी पूरी नहीं की गई है। गोरखपुर के जिलाधिकारी ने गोला तहसील के उप-जिलाधिकारी को फर्जी आवेदन मिलने पर इस तरह की गड़बड़ियां रोकने के लिए चेताया है। अलबत्ता कानपुर में गड़बड़ियां मिलने पर वहां के जिला समाज कल्याण अधिकारी समेत कई कर्मियों को सस्पेंड किया गया है।

 

 

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