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यूपी सरकार ने किये पिछड़ा वर्ग आयोग में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष व सदस्य नामित

[Edited By: Vijay]

Thursday, 17th June , 2021 04:31 pm

उत्तर प्रदेश में अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति आयोग के बाद राज्य सरकार ने पिछड़ा वर्ग आयोग में भी अध्यक्ष, उपाध्यक्ष व सदस्य नामित कर दिए हैं।

सहारनपुर के जसवंत सैनी को पिछड़ा वर्ग आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। हीरा ठाकुर और प्रभुनाथ चौहान को उपाध्यक्ष बनाया गया है। इसके अलावा आयोग में 25 सदस्य भी नामित किया गए हैं।

इसके पहले, बुधवार को आगरा के डॉ. रामबाबू हरित को उप्र. अनुसूचित जाति व जनजाति आयोग में अध्यक्ष नामित किया गया। वहीं, शाहजहांपुर के मिथिलेश कुमार व सोनभद्र के राम नरेश पासवान को आयोग में उपाध्यक्ष और 15 अन्य को सदस्य नामित किया गया। समाज कल्याण विभाग की ओर से इसकी अधिसूचना जारी कर दी गई है।

बीते सप्ताह दिल्ली में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से भेंट के बाद प्रदेश के आयोगों, निगमों व परिषदों में पार्टी नेताओं व कार्यकर्ताओं को नामित करने की यह प्रक्रिया शुरू हुई है।

सूत्रों का कहना है कि योगी की दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह व पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात के दौरान इन खाली पदों का मामला भी उठा था। मुख्यमंत्री के दिल्ली से लौटने के बाद अब यह माना जा रहा है कि जल्द अन्य सरकारी संस्थाओं में भी भाजपा नेताओं व कार्यकर्ताओं का समायोजन किया जाएगा।

क्या है राज्य पिछड़ा वर्ग. और क्या मिलती है उन्हे सुविधायें

भारत के संविधान में समाज के पिछड़े वर्गो के लिए विशेष सुविधायें एवं आरक्षण प्रदान किये गये हैं, ताकि इन जातियों / वर्गो का बहुमुखी विकास एवं जीवन स्तर अन्य वर्गो के समान हो सके। इस सम्बनध में भारत सरकार द्वारा गठित वी.पी. मण्डल आयोग की संस्तुतियों के सन्दर्भ में मा0 उच्चतम न्यायालय की नौ सदस्यीय विशेष संविधान पीठ ने “इन्दिरा साहनी बनाम भारतीय संघ“ वाद में अपने ऐतिहासिक फैसले 1992 में परमादेश जारी किया कि अन्य पिछड़े वर्गो में जातियों को सम्मिलित / निष्कासित करने के सम्बन्ध में प्रत्येक राज्य सरकार एवं केन्द्र सरकार द्वारा ऐसे ट्रिब्यूनल या आयोग गठित किये जायेंगे जो सरकार को अपनी संस्तुति करेंगे, जिन्हें सरकार सामान्यतरू मानने के लिये बाध्य होगी।

 

राज्याधीन आदि सेवाओं में अन्य पिछड़े वर्गो को अनुमन्य आरक्षण हेतु पिछड़े वर्गो की सूची में अपेक्षित समावेश करने एवं तत्सम्बन्धी शिकायतों पर सम्यक रूप से विचार कर संस्तुति देने हेतु महामहिम श्री राज्यपाल उ0प्र0 द्वारा एक स्थायी आयोग के गठन स्थापना की सहर्ष स्वीकृति शासनादेश सं0 22/16/92 कार्मिक-2 दिनांक 09 मार्च 1993 द्वारा प्रदान की गयी। इसे ष्राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग, उ0प्र0ष् नाम दिया गया। आयोग में मा0 अध्यक्ष एवं मा0 सदस्यों के सितम्बर 1993 में कार्यभार ग्रहण करने के साथ में अस्तित्व में आया। उ0प्र0 सरकार द्वारा प्रकाशित विधायी अनुभाग-1 की अधिसूचना संख्या - 1187/79-वि0/07-01(क) 29-2007 लखनऊ, 09 जुलाई 2007 द्वारा उ0प्र0 राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग (संशोधन) अधिनियम-2014 द्वारा आयोग में 01 अध्यक्ष, 02 उपाध्यक्ष तथा 25 सदस्यों की नियुक्ति की व्यवस्था की गए हैं .

आयोग अनुसूची में किसी वर्ग के नागरिकों को पिछड़े वर्ग के रूप में सम्मिलित किये जाने के अनुरोधों का परीक्षण करेगा और अनुसूची में किसी पिछड़े वर्ग के गलत सम्मिलित किये जाने या सम्मिलित न किये जाने की शिकायतें सुनेगा और राज्य सरकार को ऐसी सलाह देगा, जैसी वह उचित समझे।

तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन या राज्य सरकार के किसी आदेश के अधीन पिछड़े वर्गों के लिये उपबन्धित रक्षोपायों से सम्बन्घित सभी मामलों का अन्वेषण और अनुश्रवण करेगा और ऐसे रक्षोपायों की प्रणाली का मूल्यांकन करेगा।

पिछड़े वर्गों के अधिकारों और रक्षोपायों से वंचित किये जाने के सम्बन्ध में विशिष्ट शिकायतों की जांच करेगा।

पिछड़े वर्गों के सामाजिक-आर्थिक, विकास की योजना प्रक्रिया में भाग लेगा और उन पर सलाह देना और उनके विकास की प्रगति का मूल्यांकन करेगा।

राज्य सरकार को उन रक्षोपायों की कार्यप्रणाली पर वार्षिक व ऐसे अन्य समयों पर जैसा आयोग उचित समझे, प्रतिवेदन प्रस्तुत करना।

पिछड़े वर्गों के संरक्षण, कल्याण और सामाजिक-आर्थिक, विकास के लिए उन रक्षोपायों और अन्य उपायों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए ऐसे प्रतिवेदन में उन उपायों के सम्बन्ध में, जो राज्य सरकार द्वारा किये जायें, सिफारिश करेगा।

पिछड़े वर्गों के संरक्षण कल्याण, विकास और अभिवृद्धि के सम्बन्ध में ऐसे अन्य कृत्यों का, जो राज्य सरकार द्वारा उसको निर्दिष्ट किये जायें, निर्वहन करेगा।

आयोग की शक्तिया

राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग, उ0प्र0 राष्ट्रपति अधिनियम संख्या-1 सन् 1996 की धारा-9 की उपधारा (1) के अधीन अपने कृत्यों का पालन करते समय किसी वाद का विचारण करने वाले सिविल न्यायालय की सभी और विशेषतः निम्नलिखित बातों के सम्बन्ध में शक्तियां प्राप्त होंगी, अर्थात-

किसी व्यक्ति को समन करना और उसे उपस्थित होने के लिये बाध्य करना और शपथ पर उसकी परीक्षा करना।

किसी दस्तावेज को प्रकट और प्रस्तुत करने की अपेक्षा करना।

शपथ पत्रों पर साक्ष्य प्राप्त करना।

किसी न्यायालय या कार्यालय से किसी लोक दस्तावेज की या उसकी प्रतिलिपि की अधियाचना करना।

साक्ष्यों और दस्तावेजों की परीक्षा के लिए कमीशन जारी करना।

अन्य कोई विषय जो विहित किया जाय।

पिछड़े वर्गों का जहाँ आरक्षण हैः-

सरकारी नौकरियां।

शिक्षण संस्थायें।

तकनीकी शिक्षण संस्थायें (सी0पी0एम0टी0, इंजीनियरिंग में आरक्षण)

सरकारी आवास।

सरकारी छात्रावास।

विकास प्राधिकरण एवं आवास विकास परिषद के भवन, भूखण्ड तथा व्यवसायिक भूखण्डों में।

मण्डी परिषद की दुकानों में।

नगर निगम, नगर पालिका द्वारा निर्मित दुकानों में।

ग्राम प्रधान, जिला पंचायत अध्यक्ष, इत्यादि जहां आरक्षण हो।

 

 

 

सहारनपुर के जसवंत सैनी को पिछड़ा वर्ग आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। हीरा ठाकुर और प्रभुनाथ चौहान को उपाध्यक्ष बनाया गया है। इसके अलावा आयोग में 25 सदस्य भी नामित किया गए हैं।

इसके पहले, बुधवार को आगरा के डॉ. रामबाबू हरित को उप्र. अनुसूचित जाति व जनजाति आयोग में अध्यक्ष नामित किया गया। वहीं, शाहजहांपुर के मिथिलेश कुमार व सोनभद्र के राम नरेश पासवान को आयोग में उपाध्यक्ष और 15 अन्य को सदस्य नामित किया गया। समाज कल्याण विभाग की ओर से इसकी अधिसूचना जारी कर दी गई है।

बीते सप्ताह दिल्ली में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से भेंट के बाद प्रदेश के आयोगों, निगमों व परिषदों में पार्टी नेताओं व कार्यकर्ताओं को नामित करने की यह प्रक्रिया शुरू हुई है।

सूत्रों का कहना है कि योगी की दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह व पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात के दौरान इन खाली पदों का मामला भी उठा था। मुख्यमंत्री के दिल्ली से लौटने के बाद अब यह माना जा रहा है कि जल्द अन्य सरकारी संस्थाओं में भी भाजपा नेताओं व कार्यकर्ताओं का समायोजन किया जाएगा।

क्या है राज्य पिछड़ा वर्ग. और क्या मिलती है उन्हे सुविधायें

भारत के संविधान में समाज के पिछड़े वर्गो के लिए विशेष सुविधायें एवं आरक्षण प्रदान किये गये हैं, ताकि इन जातियों / वर्गो का बहुमुखी विकास एवं जीवन स्तर अन्य वर्गो के समान हो सके। इस सम्बनध में भारत सरकार द्वारा गठित वी.पी. मण्डल आयोग की संस्तुतियों के सन्दर्भ में मा0 उच्चतम न्यायालय की नौ सदस्यीय विशेष संविधान पीठ ने “इन्दिरा साहनी बनाम भारतीय संघ“ वाद में अपने ऐतिहासिक फैसले 1992 में परमादेश जारी किया कि अन्य पिछड़े वर्गो में जातियों को सम्मिलित / निष्कासित करने के सम्बन्ध में प्रत्येक राज्य सरकार एवं केन्द्र सरकार द्वारा ऐसे ट्रिब्यूनल या आयोग गठित किये जायेंगे जो सरकार को अपनी संस्तुति करेंगे, जिन्हें सरकार सामान्यतरू मानने के लिये बाध्य होगी।

 

राज्याधीन आदि सेवाओं में अन्य पिछड़े वर्गो को अनुमन्य आरक्षण हेतु पिछड़े वर्गो की सूची में अपेक्षित समावेश करने एवं तत्सम्बन्धी शिकायतों पर सम्यक रूप से विचार कर संस्तुति देने हेतु महामहिम श्री राज्यपाल उ0प्र0 द्वारा एक स्थायी आयोग के गठन स्थापना की सहर्ष स्वीकृति शासनादेश सं0 22/16/92 कार्मिक-2 दिनांक 09 मार्च 1993 द्वारा प्रदान की गयी। इसे ष्राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग, उ0प्र0ष् नाम दिया गया। आयोग में मा0 अध्यक्ष एवं मा0 सदस्यों के सितम्बर 1993 में कार्यभार ग्रहण करने के साथ में अस्तित्व में आया। उ0प्र0 सरकार द्वारा प्रकाशित विधायी अनुभाग-1 की अधिसूचना संख्या - 1187/79-वि0/07-01(क) 29-2007 लखनऊ, 09 जुलाई 2007 द्वारा उ0प्र0 राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग (संशोधन) अधिनियम-2014 द्वारा आयोग में 01 अध्यक्ष, 02 उपाध्यक्ष तथा 25 सदस्यों की नियुक्ति की व्यवस्था की गए हैं .

आयोग अनुसूची में किसी वर्ग के नागरिकों को पिछड़े वर्ग के रूप में सम्मिलित किये जाने के अनुरोधों का परीक्षण करेगा और अनुसूची में किसी पिछड़े वर्ग के गलत सम्मिलित किये जाने या सम्मिलित न किये जाने की शिकायतें सुनेगा और राज्य सरकार को ऐसी सलाह देगा, जैसी वह उचित समझे।

तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन या राज्य सरकार के किसी आदेश के अधीन पिछड़े वर्गों के लिये उपबन्धित रक्षोपायों से सम्बन्घित सभी मामलों का अन्वेषण और अनुश्रवण करेगा और ऐसे रक्षोपायों की प्रणाली का मूल्यांकन करेगा।

पिछड़े वर्गों के अधिकारों और रक्षोपायों से वंचित किये जाने के सम्बन्ध में विशिष्ट शिकायतों की जांच करेगा।

पिछड़े वर्गों के सामाजिक-आर्थिक, विकास की योजना प्रक्रिया में भाग लेगा और उन पर सलाह देना और उनके विकास की प्रगति का मूल्यांकन करेगा।

राज्य सरकार को उन रक्षोपायों की कार्यप्रणाली पर वार्षिक व ऐसे अन्य समयों पर जैसा आयोग उचित समझे, प्रतिवेदन प्रस्तुत करना।

पिछड़े वर्गों के संरक्षण, कल्याण और सामाजिक-आर्थिक, विकास के लिए उन रक्षोपायों और अन्य उपायों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए ऐसे प्रतिवेदन में उन उपायों के सम्बन्ध में, जो राज्य सरकार द्वारा किये जायें, सिफारिश करेगा।

पिछड़े वर्गों के संरक्षण कल्याण, विकास और अभिवृद्धि के सम्बन्ध में ऐसे अन्य कृत्यों का, जो राज्य सरकार द्वारा उसको निर्दिष्ट किये जायें, निर्वहन करेगा।

आयोग की शक्तिया

राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग, उ0प्र0 राष्ट्रपति अधिनियम संख्या-1 सन् 1996 की धारा-9 की उपधारा (1) के अधीन अपने कृत्यों का पालन करते समय किसी वाद का विचारण करने वाले सिविल न्यायालय की सभी और विशेषतः निम्नलिखित बातों के सम्बन्ध में शक्तियां प्राप्त होंगी, अर्थात-

किसी व्यक्ति को समन करना और उसे उपस्थित होने के लिये बाध्य करना और शपथ पर उसकी परीक्षा करना।

किसी दस्तावेज को प्रकट और प्रस्तुत करने की अपेक्षा करना।

शपथ पत्रों पर साक्ष्य प्राप्त करना।

किसी न्यायालय या कार्यालय से किसी लोक दस्तावेज की या उसकी प्रतिलिपि की अधियाचना करना।

साक्ष्यों और दस्तावेजों की परीक्षा के लिए कमीशन जारी करना।

अन्य कोई विषय जो विहित किया जाय।

पिछड़े वर्गों का जहाँ आरक्षण हैः-

सरकारी नौकरियां।

शिक्षण संस्थायें।

तकनीकी शिक्षण संस्थायें (सी0पी0एम0टी0, इंजीनियरिंग में आरक्षण)

सरकारी आवास।

सरकारी छात्रावास।

विकास प्राधिकरण एवं आवास विकास परिषद के भवन, भूखण्ड तथा व्यवसायिक भूखण्डों में।

मण्डी परिषद की दुकानों में।

नगर निगम, नगर पालिका द्वारा निर्मित दुकानों में।

ग्राम प्रधान, जिला पंचायत अध्यक्ष, इत्यादि जहां आरक्षण हो।

 

 

 

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