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उत्तर प्रदेश मे कई जिलें मे अंधविश्वास व्याप्त- अजीब तरीके अपनाकर भगा रहे कोरोना

[Edited By: Vijay]

Tuesday, 8th June , 2021 02:07 pm

देश में कोरोना की दूसरी लहर का कहर कमजोर पड़ता नज़र आ रहा है.  तीसरी लहर की आशंका के साथ ही उससे निपटने की तैयारियां ज़ोरों से  शुरू हो गई , टीकाकरण भी तेजी से हो रहा है. लेकिन इससे कोरोना के खिलाफ लड़ाई में उत्तर प्रदेश ही नहीं बल्कि देश के कई हिस्सों में अंधविश्वास भी दिखाई दे रहा है. कहीं लोग हवन की धूनी जमा रहे हैं तो कहीं नदियों के किनारे जल अर्पण ,कहीं पीपल के पेड़ के नीचे बैठकर ऑक्सीजन लेवल की पूर्ति भी हो ही रही है. यह नज़ारे कई ज़िलों में देखने को मिल रहे है. सबसे बड़ी सोचने की हात यह है कि क्या होम हवन मात्र से कोरोना धव्स्त हो जाएगा.  जहां एक तरफ प्रशासन के लिए चुनौती है टीकाकरण जब प्रदेश के गांवों में टीकाकरण का कड़ा विरोध प्रदर्शन हो रहा है. मुख्य रूप से अंधविश्वासस का किस्सा है चंदौली का.

चंदौली के अलीनगर वार्ड में एक काली मंदिर परिसर में भगवान कृष्ण की पूजा की गई. मुख्य रूप से यह पूजा यदुवंशी करते हैं जिसमें भगवान कृष्ण और बलराम की पूजा होती है. इसमें गोबर के उपलों को जलाकर मिट्टी के मटके में दूध की खीर बनाई गई और हैरानी की बात ये रही कि  इस खौलती खीर से पुजारी ने नहाया. माना जाता है कि जब भक्तों की मदद के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत उठाया था तब कई तरह की लीलाएं उस समय हुई और लोगों ने मां दुर्गा को शक्ति रूप मानकर भगवान कृष्ण और बलराम जी को खीर चढ़ाई. तब से ही यह परंपरा चली आ रही है.  इसमें भक्त खीर का भोग लगाकर अपने शरीर पर लगाते हैं. पूजा करने वालों का कहना है कि दैवीय आपदा में भगवान को याद किया जाता है, अभी भी कोरोना के रूप में हमारे सामने दैवीय आपदा ही आई हुई है.  ऐसे में हम रूठे हुए अपने इष्ट को मनाने का प्रयास कर रहे हैं.

वहीं दूसरा मामला बाराबंकी से आया, जहाँ ज़िले के सोहिलपुर गांव में ग्रामीणों ने ऑक्सीजन लेवल बढ़ाने का अनोखा और अजीब तरीका अपना रहे हैं. ग्रामीणों ने ऑक्सीजन लेवल बढ़ाने के लिए पुराने पीपल के पेड़ का सहारा लिया. कोरोना जैसी भयानक महामारी के दौरान गांव वाले इस पेड़ के नीचे बैठकर अपनी ऑक्सीजन लेवल बढ़ा रहे हैं. इस पेड़ के नीचे लगभग पूरा गांव इकट्ठा होकर अपना खाली समय काटता है.  ग्रामीणों ने यह भी दावा किया है कि पीपल पर देवताओं का वास तो होता है और सबसे ज्यादा ऑक्सीजन प्रोडक्शन भी इस पेड़ से ही होता है.

वहीं बात करें फिरोज़ाबाद की तो यहां स्थानीय निवासी और सभासदों ने मिलकर कोरोना भगाने का नया तरीका निकाला.  शिकोहाबाद नगर में कुछ मोहल्ले वाले रोज हवन करने के बाद हवनकुंड को ठेला पर लेकर गली-गली घूम रहे. हवन में गिलोय, कपूर, चंदन, पंच मेवा और लोबान समेत विशेष औषधियों से तैयार सामग्री डाली जा रही है. सभासद ने बताया कि एक तो मंत्रों से वातावरण में पॉजिटिव एनर्जी आती है दूसरा हवन से वातावरण शुद्ध होता है. एक तरफ कोरोना को जहां दवाइयों से हराया जाता है वहीं देवी देवताओं को याद कर कोरोना भगाने का प्रयास कर रहे हैं.

वहीं बहराइच में घाघरा किनारे बसे गांव बरसात में बाढ़ से त्रस्त हो जाते हैं, ऐसे में यहां घाघरा किनारे बसे गांव में नदी की पूजा की जाती है. कोरोना के समय में भी यह जारी है लेकिन इस बार हवन पूजन कर कोरोना को भगाने का प्रयास किया जा रहा है. यहां महिलाओं ने कोरोना महामारी को देखते हुए 7 दिन का व्रत रखा है और घाघरा नदी किनारे हवन पूजन कर रही है. पिछले 7 दिन से यह हवन पूजन 24 घण्टे चल रहा और महिलाओं ने बताया कि नदी की कटान से इतना परेशानी कभी नहीं हुई जितनी कोरोना से हुई, ऐसे में हम गंगा मैया से प्रार्थना पूजा कर रहे हैं कि  इस बीमारी से निजात मिले.

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