शुक्रवार की सुबह बॉलीवुड को एक बड़ी क्षति हुई है। हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता मनोज कुमार का निधन हो गया है। फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े तमाम लोग उन्हें सोशल मीडिया के जरिए श्रद्धांजलि दे रहे हैं। इतना ही नहीं, सेलेब्स उनके घर अंतिम दर्शन करने पहुंच रहे हैं। अब मनोज कुमार के समकालीन अभिनेता और करीबी दोस्त धर्मेंद्र उनके घर पहुंचे। जहां पर उन्होंने दिग्गज अभिनेता के निधन पर शोक जताया। एक्टर के परिवार में भी उनके निधन से मातम पसरा हुआ है। एक्टर अपने पीछे एक भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। मनोज कुमार अपनी देशभक्ति फिल्मों के लिए जाने जाते थे. इसलिए लोग उन्हें भारत कुमार भी कहते थे. उन्होंने ‘क्रांति’, ‘पूरब और पश्चिम’, ‘उपकार’, ‘रोटी कपड़ा और मकान’ जैसी कई फिल्में बनाई और देशभक्ति के साथ-साथ समाज की कमियों और समाधान को अपनी फिल्मों में दिखाते थे. दिग्गज एक्ट्रेस आशा पारेख ने कोस्टार के निधन पर दुख जताया है.
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मशहूर अभिनेता मनोज कुमार के निधन पर दुख व्यक्त किया है। उन्होंने एक्स पर लिखा वो हमारी स्मृति में अंकित रहेंगे. एक्स पोस्ट में उन्होंने कहा, “अभिनेता और फिल्मकार मनोज कुमार के निधन से दुखी हूं. उन्होंने भारतीय सिनेमा पर अमिट छाप छोड़ी है. अपने लंबे और प्रतिष्ठित करियर के दौरान वे अपनी देशभक्ति फिल्मों के लिए जाने जाते थे, जो भारत के योगदान और मूल्यों पर गर्व की भावना को बढ़ावा देती थीं.”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मनोज कुमार के निधन पर दुख जताया है. पीएम मोदी ने लिखा, महान अभिनेता और फ़िल्मकार मनोज कुमार जी के निधन से बहुत दुःख हुआ। वे भारतीय सिनेमा के प्रतीक थे, जिन्हें ख़ास तौर पर उनकी देशभक्ति के जोश के लिए याद किया जाता था, जो उनकी फ़िल्मों में भी झलकता था। मनोज जी के कामों ने राष्ट्रीय गौरव की भावना को जगाया और वे पीढ़ियों को प्रेरित करते रहेंगे। इस दुख की घड़ी में मेरी संवेदनाएँ उनके परिवार और प्रशंसकों के साथ हैं। ओम शांति।
अभिनेता-निर्देशक अनुपम खेर ने इंस्टाग्राम पर पोस्ट शेयर कर लिखा, “मनोज कुमार जी का मेरे जीवन में बहुत बड़ा योगदान रहा है और रहेगा. उनकी फिल्में, उनकी फिल्मों के गाने ना केवल हमारा मनोरंजन करते थे बल्कि हमारे अंदर देशभक्ति का बहुत खूबसूरत जज़्बा भी जगाते थे. मेरे देशभक्त होने में उनकी फिल्मों का बहुत बड़ा हाथ रहा है. मनोज जी, आप वाकई महान थे!”
सलमान खान ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, ‘मनोज कुमार जी एक सच्चे लेजेंड थे. आपकी कभी न भूली जा पाने वाली फिल्मों और खूबसूरत यादों के लिए शुक्रिया
आमिर खान ने मनोज कुमार के निधन पर शोक व्यक्त किया. उन्होंने कहा, ‘मनोज कुमार सिर्फ एक एक्टर और फिल्ममेकर नहीं थे, वह एक संस्था थे. उनकी फिल्में देखकर मैंने बहुत कुछ सीखा है. उनकी फिल्में अक्सर महत्वपूर्ण सामाजिक मुद्दों पर आधारित होती थीं, जो उन्हें आम आदमी के बहुत करीब ले आती थीं. उनके परिवार के प्रति मेरी संवेदनाएं.’
विवेक अग्निहोत्री ने एक्स पर एक लंबे मैसेज में लिखा, “भारत के पहले सच्चे मौलिक और प्रतिबद्ध भारतीय फिल्ममेकर, दादा साहब फाल्के पुरस्कार विजेता श्री मनोज कुमार जी आज हमें छोड़कर चले गए. एक गौरवान्वित राष्ट्रवादी. दिल से एक कट्टर हिंदू. एक दूरदर्शी निर्देशक जिन्होंने भारतीय सिनेमा को एक नया व्याकरण दिया – गीत चित्रण का, अर्थपूर्ण गीतों का, ऐसा सिनेमा जो न केवल मनोरंजन करता था बल्कि याद दिलाता था कि यह किससे जुड़ा हुआ है. अन्य कलाकार मृत्यु को प्राप्त होते हैं, पर देशभक्त कलाकार कालजयी होते हैं.”
मनोज कुमार जी सिर्फ़ सिनेमा के प्रतीक नहीं थे – वे मेरे परिवार की यात्रा में एक व्यक्तिगत मील का पत्थर थे। उन्होंने मेरे पिता वीरू देवगन को रोटी कपड़ा और मकान में एक्शन डायरेक्टर के तौर पर अपना पहला ब्रेक दिया। वहां से, उनका सहयोग क्रांति तक जारी रहा, जिसमें ऐसे क्षण बने जो अब भारतीय सिनेमा के सुनहरे इतिहास का हिस्सा हैं। मनोज जी की फ़िल्में – उपकार, पूरब और पश्चिम, शोर, क्रांति, वे सिर्फ़ फ़िल्में नहीं थीं…वे राष्ट्रीय भावनाएँ थीं। उनकी रचनात्मक प्रतिभा, अटूट देशभक्ति और कहानी कहने की गहराई ने एक ऐसा मानक स्थापित किया जिसकी बराबरी बहुत कम लोग कर पाए हैं। जब भारतीय सिनेमा अपने भारत कुमार को विदाई दे रहा है – एक कहानीकार, एक देशभक्त और एक किंवदंती। मैं अपने पिता की यात्रा को आकार देने और मेरे जैसे अनगिनत कहानीकारों को प्रेरित करने के लिए आपको धन्यवाद कहना चाहता हूँ। आपकी विरासत, मनोज जी, अमर है। ओम शांति”
उनका नाम हरिकिशन गिरि गोस्वामी था। देशभक्ति फिल्मों में उनके योगदान के कारण उन्हें ‘भारत कुमार’ के नाम से जाना गया. लगभग 45 फिल्मों में काम करने वाले मनोज कुमार को 1992 में पद्म श्री और 2015 में दादासाहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उनका जन्म 24 जुलाई 1937 को एबटाबाद में हुआ था। भारत के विभाजन के बाद एबटाबाद पाकिस्तान का हिस्सा बन गया। मनोज कुमार को पद्मश्री और दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया। जब भारत का विभाजन हुआ तब वह केवल 10 वर्ष के थे। उन्हें एबटाबाद छोड़कर अपने माता-पिता के साथ दिल्ली आना पड़ा। वह पुराने राजिंदरनगर किंग्स कैंप विजयनगर शरणार्थी कॉलोनी में रहते थे। उन्होंने अपनी शिक्षा दिल्ली में पूरी की। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के अंतर्गत हिन्दू कॉलेज में शिक्षा ग्रहण की। इसके बाद उन्होंने फिल्मों में काम करने का फैसला किया।

उन्हे लिखना बहुत पसंद था। उन्होंने कई फिल्मों के लिए घोस्ट राइटिंग का काम भी किया। फिर उनके दोस्त उन्हे बम्बई ले आये थे। और धीरे-धीरे उन्होंने फिल्मों में काम करना शुरू कर दिया। इसी बीच उन्हें हीरो की भूमिका की पेशकश की गई। उन्होंने कहा कि वह निश्चित रूप से हीरो के तौर पर काम करेंगे, लेकिन प्रस्ताव स्वीकार करने से पहले वह अपनी मंगेतर से बात करना चाहते थे। वे अपनी मंगेतर के पास गया और उसे बताया कि उसे एक फिल्म में नायक की मुख्य भूमिका का प्रस्ताव मिला है। 1957 की फ़िल्म ‘फ़ैशन’ में अभिनय किया। 1960 की फ़िल्म ‘कांच की गुड़िया’. ‘पिया मिलन की आस’ और ‘रेशमी रूमाल’। विजय भट्ट की फिल्म ‘हरियाली और रास्ता ने उनके लिए फिल्म इंडस्ट्री के दरवाजे खोल दिए।
फिर 1965 में उन्होंने फिल्म ‘शहीद’ बनाई। उन्होंने शहीद भगत सिंह की भूमिका निभाई। दर्शकों को यह फिल्म बहुत पसंद आई। तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने उनसे उनके प्रसिद्ध नारे ‘जय जवान, जय किशन’ पर एक फिल्म बनाने के लिए कहा और उन्होंने ‘उपकार’ फिल्म बनायी। इस फिल्म का संगीत, अभिनय अद्भुत था। इसके बाद उनकी फिल्म ‘पूरब और पश्चिम’ और ‘बे-ईमान’ आई। इस फ़िल्म के लिए उन्हें फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार मिला। मनोज कुमार ने अपने करियर की शुरुआत में घोस्ट राइटर के रूप में काम किया था। मनोज कुमार ने कई नए अभिनेताओं को मौका दिया। अमिताभ बच्चन उनमें से एक हैं। उन्हें फिल्म ‘रोटी कपड़ा और मकान’ में रोल दिया गया था। उनकी देशभक्ति फिल्मों के कारण उन्हें भारत कुमार का नाम मिला। बता दें उनका विवाह शशि गोस्वामी से हुआ। इस विवाह से उनके दो बेटे विशाल और कुणाल हुए। उनके भाई राजीव गोस्वामी ने भी फिल्मों में अपनी किस्मत आजमाई। लेकिन वह भी दिल नहीं जीत सके। मनोज कुमार उन अभिनेताओं में से हैं जिन्होंने न केवल फिल्मों में अभिनय किया बल्कि फिल्मों का निर्देशन और पटकथा भी लिखी।