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सुप्रीम कोर्ट में किसान आंदोलन पर सुनवाई जारी, अगले आदेश तक कृषि कानूनों पर लगाई रोक

[Edited By: Punit tiwari]

Tuesday, 12th January , 2021 01:49 pm

सुप्रीम कोर्ट ने तीनों कृषि कानूनों पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। इसे केंद्र सरकार के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। इसके साथ ही कोर्ट ने समस्या के समाधान के लिए कमेटी का भी गठन कर दिया है। कमेटी 4 लोग शामिल होंगे। जो सुप्रीम कोर्ट को रिपोर्ट करेंगे। खबरों के मुताबिक बनाई गई कमेटी में भारतीय किसान यूनियन के जितेंद्र सिंह मान, डॉ. प्रमोद कुमार जोशी, अशोक गुलाटी और अनिल शेतकारी शामिल हैं। लंबी बहस के बाद आखिरकार सुप्रीम कोर्ट ने मोदी सरकार के नए कृषि कानूनों के लागू होने पर फिलहाल के लिए रोक लगा दी है। सीजेआई ने कहा कि ये रोक अनिश्चितकाल के लिए है। कोर्ट ने किसानों की समस्याओं और सरकार के साथ गतिरोध को सुलझाने के लिए 4 सदस्यीय कमिटी भी बना दी है। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ने फिर कहा कि हम कृषि कानून का अमल स्थगित करेंगे, लेकिन अनिश्चित काल के लिए नहीं। हमारा मकसद सिर्फ सकारात्मक माहौल बनाना है। उस तरह की नकारात्मक बात नहीं होनी चाहिए।

इससे पहले अदालत में किसानों की ओर से एमएल शर्मा ने कहा कि किसान कमेटी के पक्ष में नहीं हैं, हम कानूनों की वापसी ही चाहते हैं। एमएल शर्मा की ओर से अदालत में कहा गया कि आजतक पीएम उनसे मिलने नहीं आए हैं, हमारी जमीन बेच दी जाएंगी। जिसपर चीफ जस्टिस ने पूछा कि जमीन बिक जाएंगी ये कौन कह रहा है? वकील की ओर से बताया गया कि अगर हम कंपनी के साथ कॉन्ट्रैक्ट में जाएंगे और फसल क्वालिटी की पैदा नहीं हुई, तो कंपनी उनसे भरपाई मांगेगी।

चीफ जस्टिस की ओर से अदालत में कहा गया कि हमें बताया गया कि कुल 400 संगठन हैं, क्या आप सभी की ओर से हैं। हम चाहते हैं कि किसान कमेटी के पास जाएं, हम इस मुद्दे का हल चाहते हैं हमें ग्राउंड रिपोर्ट बताइए। कोई भी हमें कमेटी बनाने से नहीं रोक सकता है। हम इन कानूनों को सस्पेंड भी कर सकते हैं। जो कमेटी बनेगी, वो हमें रिपोर्ट देगी।

चीफ जस्टिस की ओर से कहा गया कि अगर समस्या का हल निकालना है, तो कमेटी के सामने जाना होगा। सरकार तो कानून लागू करना चाहती है, लेकिन आपको हटाना है। ऐसे में कमेटी के सामने चीजें स्पष्ट होंगी। चीफ जस्टिस ने सुनवाई के दौरान किसानों की मांग पर कहा कि पीएम को क्या करना चाहिए, वो तय नहीं कर सकते हैं। हमें लगता है कि कमेटी के जरिए रास्ता निकल सकता है।

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