लहरों से डरकर नैया कभी पार नहीं होती , कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती ” इस कथन को सच कर दिखाया है बीजेपी ने जिसने दिल्ली विधानसभा के हालिया चुनावों में आम आदमी पार्टी को हराकर 27 सालों बाद दिल्ली की सत्ता में वापसी की है। बीजेपी के लिए ये जीत काफी अहम् है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे पर दिल्ली चुनाव में उतरी बीजेपी ने अरविंद केजरीवाल के सवाल का जवाब तो दे ही दिया है,कि दूल्हा कौन है? अब दिल्ली की सत्ता पर काबिज़ होकर बीजेपी की नज़र पश्चिम बंगाल पर है। दिल्ली की जीत से लबरेज़ मोदी-शाह के नेतृत्व में बीजेपी फिर से चुनावी राजनीति के मोर्चे पर डटकर खड़ी हो गई है और अब मिशन 26 की तैयारी में जुट गई है, लेकिन क्या ममता के गढ़ में सेंध लगाना इतना आसान होगा ? आखिर पश्चिम बंगाल में बीजेपी के सामने ममता का सियासी कद कितना भारी है आइये आपको बताते हैं न्यूज प्लस की खास रिपोर्ट में.

27 साल के सूखे के बाद दिल्ली जीत से लबरेज़ बीजेपी का पूरा कुनबा इस वक़्त उत्साहित नज़र आ रहा है और इसका जितना श्रेय मोदी-शाह के नेतृत्व और रणनीति को जाता है उससे भी ज़्यादा इंडिया गठबंधन के दो दलों कांग्रेस और आप की आपसी तकरार को जाता है क्यूंकि कई जगहों पर कांग्रेस की वजह से आप को भरी नुक्सान उठाना पड़ा और परिणाम सबके सामने है , जीत बीजेपी के लिए तो खास है लेकिन पीएम मोदी के नेतृत्व में बीजेपी को आम आदमी पार्टी की चुनौती से निपटने में करीब 12 साल का वक्त लगा. लेकिन अब पश्चिम बंगाल बीजेपी के निशाने पर है पर ये उतना आसान नहीं होगा जितना दिल्ली रहा क्यूंकि ममता बनर्जी का सियासी कद अरविन्द केजरीवाल से ज़्यादा बड़ा है, उनकी पार्टी भी आम आदमी पार्टी से कही ज़्यादा पुरानी है और ममता के साथ बंगाली अस्मिता भी जुडी हुई है जिसका तोड़ निकालना बीजेपी के लिए बड़ा मुश्किल होगा।
बंगाल में ममता का दम
मोदी की अगुवाई में बीजेपी ना सिर्फ तीन बार केंद्र में सरकार बनाने में क़ामयाब रही बल्कि इस दौरान कई राज्यों में ‘कमल का फूल भी खिलाया’, लेकिन पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी इस दौरान बीजेपी को कड़ी चुनौती देती आई हैं. पश्चिम बंगाल की सियासत में ममता बनर्जी को एक फाइटर कहा जाता है। ममता बनर्जी की टीएमसी ने पश्चिम बंगाल में 34 साल पुराने लेफ्ट के किले को ढहाया था. कांग्रेस पार्टी से निकलीं ममता बनर्जी ने साल 1998 में ‘तृणमूल कांग्रेस’ का गठन किया. 13 साल बाद 2011 में ममता बनर्जी ने पहली बार पश्चिम बंगाल की सत्ता हासिल की। 2014 के लोकसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल की दो लोकसभा सीटों पर जीत दर्ज करने के बाद बीजेपी ने राज्य में ममता बनर्जी को चुनौती देना शुरू कर दिया. 2016 के चुनाव में हालांकि बीजेपी को महज तीन सीटें मिलीं, लेकिन उसका वोट शेयर 4 फ़ीसदी से बढ़कर 10 फ़ीसदी पर पहुंच गया.
भारतीय जनता पार्टा को पश्चिम बंगाल में असल सफलता 2019 के लोकसभा चुनाव में मिली जब वो राज्य की 42 सीटों में 18 सीटों पर जीत दर्ज करने में सफल रहीं. लेकिन 2021 में ममता बनर्जी ने ‘राज्य’ की 294 विधानसभा सीटों में से 215 पर जीत दर्ज की. हालांकि लेफ़्ट और कांग्रेस पार्टी को पछाड़ते हुए बीजेपी 77 सीटें जीतकर राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी बन गई. 2024 के लोकसभा महाचुनाव में भी ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में अपनी स्थिति मजबूत रखी और 42 सीटों में से 29 सीटों पर जीत हालिस की. बीजेपी पार्टी को 6 सीटों का नुकसान हुआ और वह 12 सीटों पर थम गई. लेकिन दिल्ली की जीत के बाद बीजेपी की नज़र 2026 में पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी को पछाड़ने पर है. लेकिन दिल्ली जीत के बाद ममता अपने पुराने सहयोगी शुभेंदु अधिकारी की तरफ से चेतावनी भरी घोषणा के बाद अपने स्तर पर अलर्ट हो गई हैं और तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ताओं को आगाह करने के साथ ही ममता बनर्जी ने कांग्रेस नेतृत्व के लिए भी अपना इरादा जाहिर कर दिया है. ममता बनर्जी हरियाणा और दिल्ली का उदाहरण देते हुए कांग्रेस और आम आदमी पार्टी दोनो को बीजेपी की जीत के लिए जिम्मेदार ठहरा रही हैं. सूत्रों के मुताबिक ममता बनर्जी ने कार्यकर्ताओं को भरोसा दिलाया है कि वो चौथी बार भी पश्चिम बंगाल में सरकार बनाने में सफल रहेंगी. यानि ममता ने अपने इरादे ज़ाहिर कर दिए हैं कि वो मुकाबले के लिए तैयार हैं।
बंगाल में खिलेगा कमल ?
दिल्ली चुनाव में मिली जीत से बीजेपी का आत्मविश्वास बढ़ा है और वो ज़्यादा मजबूती से ममता बनर्जी को चुनौती देने की कोशिश करेगी. ममता बनर्जी सरकार में हैं और बीजेपी विपक्ष में है. फिलहाल तो यही नज़र आता है कि टक्कर ममता बनर्जी और बीजेपी के बीच ही होने वाली है. कांग्रेस और लेफ़्ट चुनौती देने की स्थिति में नज़र नहीं आ रहे। 2021 के चुनाव से पहले टीएमसी छोड़कर बीजेपी के लिए मोर्चा संभाल रहे शुभेंदु अधिकारी ने दिल्ली की नतीजे आने के बाद मीडिया से कहा, दिल्ली की जीत हमारी है
2026 में बंगाल की बारी है।
भारतीय जनता पार्टा (BJP) ने पश्चिम बंगाल में परफ़ॉर्म करके दिखाया है. ऐसा नहीं है कि ममता बनर्जी को हराया नहीं जा सकता, लेकिन ममता बनर्जी के कार्यकर्ताओं की बड़ी संख्या है और उन्हें हराना बड़ी चुनौती होगी. वहीं, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष व केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार के मुताबिक बड़े पैमाने पर वित्तीय भ्रष्टाचार, लोकलुभावन योजनाओं, दान वितरण और व्यक्तिवाद के आरोप ही वे तीन मुख्य बिंदु हैं जो दिल्ली की तरह बंगाल की राजनीति में समान हैं। दिल्ली चुनाव में इसका खामियाजा सत्ता गंवाकर अरविंद केजरीवाल को भुगतना पड़ा । अब इन्हीं मुद्दों को लेकर भाजपा 2026 में बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव में ममता को हराने का लक्ष्य लेकर चल रही है।साथ ही बीजेपी वादों का पिटारा लेकर भी चल रही है…. बंगाल मेंअभीआवास योजना के तहत एक लाख 20 हजार रुपये दिए जा रहे हैं। बीजेपी का दावा है कि इस पैसे से घर नहीं खरीदा जा सकता। भाजपा सत्ता में आई तो आवास योजना के तहत एक लाख 80 हजार रुपये दिए जाएंगे।वहीं, जिन लोगों को आवास योजना का लाभ नहीं मिला है, उन्हें सीधे तीन लाख रुपये दिए जाएंगे।वहीं अगर बीजेपी सत्ता में आई तो हम महिलाओं को मौजूदा सरकार की लक्ष्मी भंडार परियोजना के तहत मिलने वाली राशि से अधिक देंगे।
ममता पर निशाना
केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने रविवार को यह दावा किया कि बीजेपी 2026 में पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनावों में जीत हासिल कर सरकार बनाएगी। केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सरकार पर केंद्र की योजनाओं के कार्यान्वयन में बाधा डालने का आरोप लगाया और कहा कि वह केंद्र सरकार पर अनदेखी करने का झूठा आरोप लगा रही है। भाजपा का वोट शेयर 2019 से पश्चिम बंगाल में 30-40 प्रतिशत के बीच रहा है और यदि पार्टी को 10 प्रतिशत और वोट मिलते हैं, तो वह ममता बनर्जी सरकार को सत्ता से बेदखल कर देंगे। उन्होंने आम आदमी पार्टी की दिल्ली विधानसभा चुनावों में हार को भाजपा के प्रति जनता के बढ़ते विश्वास और अरविंद केजरीवाल सरकार की भ्रष्ट नीति के खिलाफ जनादेश करार दिया। ममता सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि, जब वे केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री थे, तब उन्होंने ओडिशा, झारखंड और पश्चिम बंगाल को जोड़ने वाली 710 किलोमीटर लंबी गैस पाइपलाइन परियोजना स्थापित करने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन पश्चिम बंगाल की ओर से सहयोग ना मिलने के कारण परियोजना अधूरी रह गई है। टीएमसी सरकार ने पश्चिम बंगाल में पाइपलाइन विस्तारित करने के लिए भूमि नहीं दी और रेलवे परियोजनाओं व नवोदय विद्यालयों की स्थापना में भी सहयोग नहीं किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार केंद्र द्वारा प्रायोजित किसी भी योजना को लागू करने से इसलिए रोकती है क्योंकि उसे लगता है कि इससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को श्रेय मिलेगा। रेलवे ने पश्चिम बंगाल के लिए वार्षिक बजट को यूपीए सरकार के समय के 4,000 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 13,995 करोड़ रुपये कर दिया है, लेकिन राज्य सरकार इसे कार्यान्वित करने में असफल रही है। शिक्षा क्षेत्र को लेकर प्रधान ने कहा कि राज्य सरकार विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की ड्राफ्ट गाइडलाइन की अनुचित आलोचना कर रही है।
आरोप प्रत्यारोप के बीच बीजेपी और ममता दोनों ही 2026 की तैयारियों में लगे हैं , सियासी बिसात पर सब अपनी जीत के मोहरे बिछाने पर लगे हैं , बीजेपी दिल्ली वाला चमत्कार पश्चिम बंगाल में दिखाना चाहेगी लेकिन बंगाल के जादू के आगे बीजेपी का कौन सा जादू काम करेगा ये देखने वाली बात होगी फिलहाल सियासत का खेल जारी है अब देखना ये है कि कौन किस पर भारी है। अनुराग सक्सेना स्पेशल डेस्क न्यूज प्लस 24*7।